Wednesday, January 4, 2017

स्वामी दयानंद और स्वामी विवेकानंद

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  1. विवेकानंद की सच्चाई
    विवेकानंद नाम आते ही एक राष्ट्र भक्त हिन्दू महात्मा की छवि उभरती है |परन्तु मित्रो इससे पहले कुछ प्रमाणों पर नजर डालते है | क्योकि बिना सच जाने और माने कभी हम धर्म की रक्षा यही कर पाएंगे |
    "कम्पलीट वर्क और विवेकानंद" नामक पुस्तक में विवेकानंद जी के संसार भर में दिए गए व्याख्यानों और लिखे गए पत्रो को उन्ही के स्थापित किया संघठन ने छापा है |
    1: स्वामी विवेकानंद द्वारा पशु बलि Sister Christine को बेलुरे मठ हावड़ा से 12th November 1901 को Sister Christine को लिखे अपने पत्र में लिखते हैं की हमने काली मां की पूजा की और बकरे की बली दी। स्वामी जी अपनी अज्ञानता के कारण जहाँ वैदिक धर्म पर बली का आरोप जड़ते हैं वही खुद वो ही निंदनीय कर्म करने मे संलग्न होते हैं। We had an image, too, and sacrificed a goat and burned a lot of fireworks. The complete work of Swamee Vivekanand, Vol – 9- Pg 169
    2: Mrs Ole Bull को Alambazar Math Calcutta (Darjelling ) से 26 th March
    1897 को लिखे अपने पत्र में अपनी बीमारी से ग्रस्त होने को बयां करते हुए स्वामी विवेकानंद लिखते हैं की केवल मांस खाना ही लम्बी आयु का राज है Admitting about the diabetes problem he
    said that Eating only meat and drinking no water seems to be the only way to prolong
    life -The complete work of Swamee Vivekanand, Vol – 9- Pg 93
    3: मैरी नामक महिला को 28th April 1897 को अपने स्वास्थय के बारे में लिखते हुए स्वामी विवेकानंद लिखते हें की मेरे बाल भूरे हो गए हें चहरे पर झुर्रियां पड़ने लगी हैं और में अपनी उम्र से 20 वर्ष ज्यादा का दिखने लगा हूँ। मेरा शरीर कमजोर हो रहा है। में मांस खाने के लिए ही बना हूँ ना रोटी ना आलू ना राइस ना ही शक्कर| My hair is turning grey in bundles, and my face is getting wrinkled up all over; that losing of flesh has given me twenty years of age more. And now I am losing flesh rapidly, because I am made to live upon meat and meat alone — no bread, no rice,
    no potatoes, not even a lump of sugar in my coffee!! I
    -The complete work of Swamee Vivekanand, Vol – 6- Pg 391
    4: अगर भारत के लोग चाहते है की में हिन्दू धर्म के अनुसार भोजन करू तो उनसे कहो की मेरे लिए पर्याप्त धनराशि और रसोइया भेज दे | If the people in India want me to keep strictly to my Hindu diet, please tell them to send me a cook and money enough to keep him. -The complete work of Swamee Vivekanand Vol 5 , Page 95
    5: चाहे कोई कुछ भी कहे परन्तु सच ये ही है की जो जो देश भोजन के रूप में हमेशा मांस का सेवन नियमबद्ध करते है वे निसंदेह वीर, पराक्रमी और विचारवान है | Whatever one or the other may say, the real fact, however, is that the nations who take the animal food are always, as a rule, notably brave, heroic and thoughtful.
    The complete work of Swamee Vivekanand, Vol – 6- Pg 484
    6: मेरे अनुभव से अगर संसार में कोई धर्म समानता, सोहाद्र और प्रेम की प्रसंशनीय प्राप्ति कर सकता है तो वह सिर्फ और सिफ इस्लाम है| हमारी अपनी मातृभूमि के लिए एक ही उम्मीद है दो महान प्रणाली, हिंदू धर्म और इस्लाम का मिला जुला एक स्वरुप - वेदांत मस्तिष्क और इस्लामिक शरीर| Whether we call it Vedantism or any ism, the truth is that Advaitism is the last word of religion and thought and the only position from which one can look upon all religions and sects with love On the other hand, my experience is that if ever any religion approached to this equality in an appreciable manner, it is Islam and Islam alone.
    For our own motherland a junction of the two great systems, Hinduism and Islam — Vedanta brain and Islam body — is the only hope.
    The complete work of Swamee Vivekanand, Vol –6

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