Saturday, October 17, 2015

क्या हम आज भी गुलाम हैं?


क्या हम आज भी गुलाम हैं?

"विदेशियों के आर्यावर्त में राज्य होने का कारण आपस कि फुट-मतभेद, ब्रह्मचर्य का सेवन न करना, विद्या न पढ़ना पढ़ाना, बाल्यावस्था में अस्वयंवर विवाह, विषयासक्ति कुलक्षण, वेद-विद्या का अप्रचार आदि कुकर्म हैं"- स्वामी दयानंद।


स्वामी जी द्वारा कहे गये इस कथन पर पाठक गौर करेगए तो पायेगे कि पराधीन भारत और स्वाधीन भारत में सामाजिक और राजनैतिक परिस्तिथियों में कुछ विशेष अंतर नहीं हैं, क्यूंकि हम तब भी गुलाम थे और आज भी गुलाम हैं।

      स्वामी दयानंद अपने चित्तोड़ भ्रमण के समय चित्तोड़ के प्रसिद्द किले को देखने गए। किले की हालत एवं राजपूत क्षत्राणियों के जौहर के स्थान को देखकर उनके मुख से निकला की अगर ब्रह्मचर्य की मर्यादा का मान होता तो चित्तोड़ का यह हश्र नहीं होता। काश चित्तोड़ में गुरुकुल की स्थापना हो जिससे ब्रह्मचर्य धर्म का प्रचार हो सके।

स्वामी दयानंद के चित्तोड़ सम्बंधित चिंतन में ब्रह्मचर्य पालन से क्या सम्बन्ध था यह इतिहास के गर्भ में छिपा सत्य हैं। जेम्स टॉड के अनुसार राजपूतों की सबसे बुरी आदत अफीम खाना और अधिक विवाह करना था। अनेक विवाहों से उत्पन्न अनेक राजकुमारों में सत्ता के लिए सदा संघर्ष रहता था। अनेक बार वे राजकुमार अपने शत्रु का सहारा लेकर अपने ही भाई पर आक्रमण करते थे।

1.  राणा सांगा एक और जिस बाबर से युद्ध किया था। उसी बाबर को भारत पर हमला करने का निमंत्रण देने वाली रानी कर्मवती थी जो मारवाड़ के राव सूजा की पोती थी जिसने रत्न सिंह से मतभेद के चलते ऐसा किया था।

2. उदय सिंह ने धीरबाई से मोह के चलते उसके बेटे जगमाल चित्तोड़ का उत्तराधिकारी बना दिया जबकि राजपूत सरदारों ने प्रताप को राणा बना दिया।इससे नाराज होकर जगमाल, सगर और अगर अकबर की सेना में भर्ती हो गए और जीवन भर राणा प्रताप के विरुद्ध लड़ते रहे।

3. वीर शिवाजी का पुत्र शम्भाजी भी व्यसनी था। उसने अपने सौतेले भाई राजाराम को जेल में डाल दिया और गद्दी पर बैठ गया। उसके व्यसन के दोष के चलते वह औरंगज़ेब का कैदी बन मारा गया।

4. भरतपुर के राजा सूरजमल के पुत्र जवाहर सिंह और नाहर सिंह गद्दी के लिए संघर्ष हुआ। बाद में नवल सिंह और रणजीत सिंह के मध्य संघर्ष हुआ। इनके सभी के संघर्ष के चलते सम्पूर्ण राजकोष को खाली हो गया। उनका एक पुत्र रतन सिंह व्यसन के चलते सदा नर्तकियों से घिरा रहता था। उसकी हत्या भी शराब के नशे में वेशयाओं का नृत्य देखते हुई थी।

5. वीर दुर्गा दास राठोड के संरक्षण में पला बढ़ा अजित सिंह भी विलासिता का शिकार हो गया। उसी के पुत्र ने उसे उसकी विलासिता के चलते मार डाला था।

इतिहास की इन घटनाओं का उदहारण इसीलिए दिया जा रहा हैं क्यूंकि इनसे प्रेरणा लेने के स्थान पर भारत देश के युवाओं को बर्बाद करने के लिए अश्लीलता और व्यसनों का जहर उनके मस्तिष्कों में भरा जा रहा हैं। अलग अलग कुतर्क देकर शराब पीने के लिए, व्यभिचार करने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। यही कारण बलात्कार, लड़कियों से छेड़छाड़, बिगड़ते घर और सामाजिक अव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। हमारा समाज इतना नपुंसक हो गया है की वह अपने प्राचीन ब्रह्मचर्य गौरव की रक्षा करने में असक्षम हो गया हैं। हाल ही में सरकार द्वारा अश्लील साइट्स पर प्रतिबन्ध लगाने के विवाद ने इतना तूल पकड़ा की सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े। मैं इसे सरकार की कमजोरी मानता हूँ जो वह अपनी बात को सक्षम रूप से रखने के स्थान पर पीछे हट गई। देश के युवाओं का चरित्र निर्माण  हमारे अस्तित्व, हमारी वैचारिक स्वतंत्रता, हमारी बुद्धि के सकारात्मक विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। क्यूंकि एक आदर्श समाज के निर्माण की बुनियाद इसी सिद्धांत पर टिकी हैं। वर्तमान के जहरीले सामाजिक परिवेश को देखकर केवल यही मन में विचार आता हैं कि "क्या हम आज भी गुलाम हैं?"

डॉ विवेक आर्य

No comments:

Post a Comment